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किताब का नाम: मोहम्मद रफ़ी : स्वयं ईश्वर की आवाज़
लेखक: राजू कोरती, धीरेन्द्र जैन
अनुवाद: प्रयाग शुक्ल
प्रकाशन: बहुवचन (नियोगी बूक्स)
शैली: जीवनी
रेटिंग: 5/5 स्टार्स


" एक बंजारा गाए, जीवन के गीत सुनाए/ हम सब जीने वालों के जीने की राह बतये..."

शहंशाह-ए-तरन्नुम मोहम्मद रफ़ी जिन्हें दुनिया रफ़ी साहब के नाम से बुलाती है, हिन्दी सिनेमा के श्रेष्ठतम पार्श्व गायकों में से एक थे। उनकी जिंदगी के कुछ अनमोल पलों को लेखक राजू कोरती और पत्रकार धीरेन्द्र जैन जी ने इस किताब मे सजाया हैं। उनकी शुरुआती जीवन और संघर्ष, ऑल इंडिया रेडिओ से संगीत में आना, पार्श्वगायक के रूप में उनको मिली सफलता, इन सारी यादों का बहुत सुन्दर रूप से वर्णन किया गया हैं। रफ़ी साहब को हिन्दी फिल्म उद्योग में आज भी कितने प्रेमपुर्वक याद किया जाता है, ये आपको इस किताब को पढ़के पता चलेगा। संगीतकार रवींद्र जैन उनके बारे में कहते है,

रफ़ी साहब ने नाम अपना मोहम्मद से सजाया है,
मोहम्मद की दुआ से मर्तबा आलम में पाया है।
गए जिस रोज़ से वौ अलविदा कहकर जमाने को,
न ऐसा खुश गुलू आया है, न ऐसा शख़्स आया है।

मोहम्मद रफ़ी का जन्म 24 दिसम्बर 1924 को अमृतसर, के पास कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था। जब मोहम्मद रफी करीब सात साल के हुए तब उनका परिवार रोजगार के सिलसिले में लाहौर आ गया। रफ़ी 1941 के आसपास लाहौर पहूँचे। वहा उनके पिता ने उन्हे एक सैलून में बाल काटने का काम दिला दिया। वहा से मार्च 1943 को रफ़ी साहब ऑल इंडिया रेडिओ के लाहौर स्टेशन के स्टुडियोज में ऑडिशन में सफल होते हैं, और यही से शुरुयात होती हैं उनकी संगीत के सफर की।

उनकी इस जीवनी में गहन शोध के बाद उन करीब 7000 गीतों का वर्णन है, जो रफ़ी साहब ने देश-विदेश में प्रस्तुत किया था। सिलसिलेवार तरिके से लेखकों ने हर एक गीत और उनसे जुड़ स्मृतियों और जानकारियों को बड़े रोचक ढंग से प्रस्तुत किया हैं। साथ ही किताब मे कुछ दुर्लभ तस्वीरें भी है जो आपकों उन पुराने दिनो की याद दिलाएगा।

मुझें व्यक्तिगत रुप से रफ़ी साहब की बेटी नसरीन जी का इंटरव्यू और 1960 के दशक के सुबिख्यात अनाउंसर गोपाल शर्मा जी का इंटरव्यू बहुत ही ज्यादा पसन्द आया। रफ़ी साहब की उपलब्धियो को लेकर जो भाग लिखा गया है वौ भी बहुत रोचक तथ्यों से भरपुर हैं। 'भगवान और उसके पुजारी' वाले अध्याय में आपकों दुनिया भर में फैले रफ़ी साहब के प्रशंसकों से उनके बारे में कही गयी बातें पता चलेंगी।

अगर आप राफ़ी साहब के गाने सुनते है, और उनकी जिंदगी को और करीब से जानने की ख्वाहिश रखते है, तो उनकी इस जीवनी को जरूर पढ़े।

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A freelance blogger and Bookstagrammer,Animesh Das is a Gold Medalist alumnus of Guru Ghasidas Central University, Chhattisgarh. A large number of his Research articles, poems, book-reviews and short-stories have been published in various national and International Journals, Magazines and Anthologies. He has a penchant for music, photography and recitation. You can catch him on Instagram @booksandbeard

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